चाची के बड़े आम चूसकर चुत चोदी antervasna stories

Category: चाची की चुदाई, today sex story

Post Updated On:

Hindi Sex Stories चाची की चुदाई antervasna stories

चाची Xxx चुदाई कहानी में एक बार मैं चाचा के घर गया. चाची कुछ चालू किस्म की थी. मैं उनसे गाँव की औरतों के गैर मर्दों से सम्बन्ध की बात करने लगा.

दोस्तो, कैसे हैं आप सब? आशा करता हूँ कि आप सब लोग ठीक होंगे.
भगवान से प्रार्थना है कि आप सब सलामत रहें.

मेरा नाम वीर है. मेरी उम्र 37 साल है.

मैं अन्तर्वासना से काफी टाइम से जुड़ा हुआ हूँ.
मुझे इस साइट पर सेक्स कहानियां पढ़ना बहुत पसंद है.

सेक्स कहानी पढ़ते-पढ़ते मैंने सोचा कि क्यों न मैं अपने साथ हुई घटना को लिखूँ, जो कि वास्तविक है.

वैसे मैंने चाची Xxx चुदाई कहानी लिखने में बहुत सावधानी रखी है अगर फिर भी कोई त्रुटि रह जाए तो माफ़ कर देना.

मैं ये तो नहीं कहूँगा कि मेरा लंड 7 इंच का है या 8 इंच का है.
यह एक आम भारतीय की तरह नॉर्मल साइज़ का ही है.

ये अन्तर्वासना पर मेरी दूसरी कहानी है.
मेरी पहली कहानी का रिस्पॉन्स कुछ मिला-जुला रहा था.

ये कुछ टाइम पहले की बात है.
मेरे गांव के रिश्ते के एक चाचा मेरे घर से कुछ दूरी पर रहते थे.
वे अभी भी वहीं हैं, पर मैंने वह जगह छोड़ दी है.
वे अपने 2 बेटों और अपनी पत्नी के साथ रहते हैं.

एक दिन की बात है … मैं किसी काम से चाचा के घर गया तो पता लगा कि वे गांव जाने की तैयारी कर रहे हैं और उसी दिन शाम को उन्हें गांव जाना था.

मैं अपनी बाइक से उनके घर गया था तो उन्होंने बस मुझे स्टेशन तक छोड़कर आने को कहा.
मैं उन्हें छोड़ने चला गया.

जब मैं उन्हें छोड़कर वापस आने लगा तो चाचा ने कहा- घर से होते हुए जाना. और कुछ सामान लाना है तो चाची को वह सामान देते हुए जाना और घर का ध्यान रखना.

मैं उन्हें छोड़कर वापस चाची के पास आ गया.
जब मैं वापस आया तो चाची के दोनों बेटे सो चुके थे क्योंकि उन्हें दिन में सोने की आदत थी.

मैंने चाची से सामान के लिए पूछा तो उन्होंने बताया और मैंने उन्हें लाकर दे दिया.

फिर उन्होंने मुझे चाय के लिए पूछा तो मैंने हां कह दिया.

वे किचन में जाकर चाय बनाने लगीं और मैं उनके साथ जाकर खड़ा हो गया और बातें करने लगा.

मुझे उन चाची के बारे में थोड़ा-बहुत पता था कि उनका चक्कर गांव के किसी लड़के से चल रहा था, जब वे गांव में रहती थीं.
मैंने सोचा कि थोड़ी कोशिश करके देख लेना चाहिए क्योंकि चाची एक मस्त माल हैं.

अब मैंने जानबूझ कर चाची से गांव की लड़कियों-औरतों के चक्कर के बारे में बातें करना शुरू कर दिया कि किसका चक्कर किससे चल रहा है.
चाची भी मज़े लेकर मुझे सबके किस्से सुनाने लगीं.

किस्से सुनते-सुनते मैंने अचानक चाची से पूछ लिया- आपका चक्कर किससे चल रहा है?
यह सुनकर वे शर्माने लगीं.

मैंने फिर थोड़ा ज़ोर लगाकर पूछा तो उन्होंने मेरे गांव के एक दोस्त का नाम बता दिया.
उसका नाम सुनकर मुझे थोड़ा झटका लगा कि साले ने मेरी चाची की ले ली और मुझे बताया तक नहीं.

वे मुझे चुप देख कर बोलीं- क्या हुआ?
मैंने कहा- कुछ नहीं … बस यूं ही कुछ सोचने लगा था.

चाची बोलीं- तुम अपनी भी तो सुनाओ … तुमने किसके साथ क्या क्या किया?
मैंने कहा- चाची, मेरा तो गांव में किसी के साथ कोई चक्कर नहीं रहा.

हम दोनों में इसी तरह की बातें होने लगी थीं.

फिर मैंने अपने मन में थोड़ा आगे बढ़ने का सोचा और थोड़ा डरते हुए चाची से कहा- चाची, आपके बूब्स बहुत बड़े-बड़े हैं क्या मैं इन्हें छूकर देख सकता हूँ?

मेरी आशा के उलट उन्होंने तुरंत हां कह दिया, मुझे बहुत ख़ुशी हुई और मैंने चाची को पीछे से पकड़ लिया.
उनके ब्लाउज़ के ऊपर से ही मैं उनके बूब्स दबाने लगा.

उनके बूब्स इतने बड़े थे कि मेरे दोनों हाथों में नहीं आ रहे थे.
मैंने कुछ देर उनके बूब्स दबाए.

फिर मैंने उनसे बूब्स को खोलकर दिखाने को कहा तो उन्होंने हां तो कह दिया.
पर वे बोलीं- पहले चाय पी लो और बच्चों के कमरे की कुंडी बाहर से लगा कर दूसरे रूम में चलो!

मैंने झटपट बच्चों वाले कमरे की कुंडी बाहर से लगा दी और दूसरे कमरे में चाय लेकर चाची के साथ चला गया.
मैंने जल्दी से चाय ख़त्म की.
फिर चाची से कहा- बूब्स को खोलकर दिखाओ!

तब तक चाची ने भी चाय ख़त्म कर ली थी और उन्होंने मुझसे कहा- तुम्हें देखना है, तो तुम खुद ही खोल लो!

मैं उठा और उनका ब्लाउज़ खोलने लगा.
मैंने उनका ब्लाउज़ उतार दिया.

उन्होंने लाल रंग की ब्रा पहनी हुई थी पर उनके बूब्स ब्रा में पूरी तरह से नहीं आ रहे थे.
मैंने उनकी ब्रा भी उतार दी.

उनके बड़े-बड़े बूब्स देखकर मैं हैरान हो गया.
ब्राउन रंग के निप्पल थे … वे भी बहुत बड़े-बड़े थे.

मैंने उनसे पूछा- चाची, मैं इन्हें छूकर देख सकता हूँ?
उन्होंने हां कहा.

फिर मैंने उनके बूब्स और निप्पल को छूकर देखा तो दूध बहुत ज़्यादा नर्म थे जबकि निप्पल उतने ही ज़्यादा हार्ड.

फिर मैं उनके बूब्स को दबाने लगा और निप्पल को खींचने लगा.
धीरे-धीरे उनकी आंखें लाल होती जा रही थीं … जैसे उन्हें चुदास का नशा चढ़ रहा था.

उस समय मैं बेड पर बैठा था और चाची नीचे खड़ी थीं.
उनके बूब्स बिल्कुल मेरी आंखों के सामने थे.

मैंने अचानक से उनके निप्पल को अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगा

चाची के मुँह से सिसकारी निकल गई.
मैं समझ गया कि चाची अब धीरे-धीरे गर्म हो रही हैं.

मैं कुछ देर तक उनके बूब्स से खेलता रहा … एक बूब्स को हाथ से दबा रहा था और दूसरे को मुँह से चूस रहा था.

फिर मैंने धीरे से उनकी पजामी में हाथ डालना शुरू किया.
उन्होंने कोई ऐतराज़ नहीं दिखाया.

धीरे-धीरे मैं अपना हाथ नीचे की तरफ़ सरकाता गया और मेरा हाथ सीधे उनकी चुत पर फूले हुए भगनासा पर जाकर लगा.

उन्होंने ज़ोर से सिसकारी भरी और मुझे खड़ा करके किस करने लगीं.
मैंने धीरे से अपना हाथ और नीचे किया और उनकी पूरी चूत को हाथ से मसलने लगा.

वे भी मुझे उतनी ही तेज़ी से किस करने लगीं.
उनकी चूत बहुत गीली हो गई थी.

फिर मैंने उनसे कहा- मुझे आपकी चूत देखनी है!
उन्होंने अपनी पजामी उतारने को बोला.

मैंने खड़े-खड़े उनकी पजामी उतार दी.
उन्होंने अन्दर पैंटी नहीं पहनी थी.
उनकी चूत पर छोटे-छोटे बाल थे और चूत का चीरा भी बहुत छोटा था.

दो बच्चों की मां होने के बावजूद उनकी चूत बहुत ही छोटी थी.
ऐसा लग ही नहीं रहा था कि उस चूत से दो बच्चे बाहर आए हैं.

मैंने उन्हें बेड पर लेटा दिया ताकि मैं उनकी चूत को अच्छे से देख सकूँ.
फिर मैंने उनकी चूत को दोनों हाथों से खोलकर देखा, अन्दर से उनकी चूत बहुत लाल थी.

मेरा मन उनकी चूत को चाटने का कर रहा था.
पर वे पता नहीं कितने लोगों से चुदी होंगी … ये सोचकर मैंने उनकी चूत को मुँह से नहीं चाटा.

लेकिन मैंने अपनी उंगली से उनकी चूत चोदना शुरू कर दिया.

फिंगर फक करने से उनकी चूत ने और ज़्यादा पानी छोड़ना शुरू कर दिया और उनकी मदभरी सिसकारियां और तेज़ होने लगीं.

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था तभी मैंने उनसे कहा- मुझे आपको चोदना है!
उन्होंने कहा- जो करना है करो, पर मुझे शांत करो!

फिर मैंने एक-एक करके अपने कपड़े उतारने शुरू किए.
मेरा लंड पहले से ही खड़ा था … बिल्कुल कुतुबमीनार की तरह.

उन्होंने मेरे लंड को देखा और बोलीं- बड़ा मस्त लंड है तेरा!

फिर मैं उन्हें चोदने की तैयारी करने लगा.

मैं हमेशा अपने पर्स में एक या दो कंडोम रखता हूँ क्योंकि आपने एक कहावत तो सुनी होगी कि चूत और भूत कहीं भी मिल सकते हैं … तो अपनी सुरक्षा अपने पास रखो.
इसलिए मेरे पर्स में 2 कंडोम रखे हुए थे.

मैंने जल्दी से दोनों कंडोम निकाले और एक कंडोम अपने लंड पर चढ़ा लिया.
मेरा मन तो लंड चुसवाने का बहुत था पर वह चाची गांव से होने के कारण इतना सब नहीं जानती थीं.

मैंने देर करना सही नहीं समझा.
बस जल्दी से एक कंडोम अपने लंड पर चढ़ाया और चाची को बेड के किनारे पर करके उनके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखवा लिया … जिससे उनकी चूत मेरे लंड के बिल्कुल पास आ गई.

अब मैंने अपना लंड उनकी चूत से सटाकर एक धक्का धीरे से मारा.
मेरे लंड का सुपाड़ा उनकी चूत में घुस गया और उन्होंने ज़ोर से सिसकारी ली.

अगला झटका मैंने ज़ोर से मारा और अपना पूरा का पूरा लंड उनकी चूत में अन्दर तक डाल दिया.
इस बार उन्होंने बहुत ज़ोर से सिसकारी ली और बोलीं- आराम से डाल न … कहीं भाग थोड़ी ना रही हूँ!

अब मैं धीरे-धीरे अपना लंड उनकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा.
मुझे इस वक़्त बहुत ही मज़ा आ रहा था … ऐसा लग रहा था जैसे मैं आसमान में उड़ रहा हूँ.

फिर मैं ज़ोर-ज़ोर से उन्हें चोदने लगा.
एक हाथ से उनके बूब्स को दबाने लगा और मुँह से उनके निप्पल को चूसने लगा.

उनकी चूत से ‘पच-पच’ की आवाज़ आने लगी क्योंकि उनकी चूत बहुत ज़्यादा पानी छोड़ रही थी.

मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उनकी पजामी से उनकी चूत के पानी को साफ़ किया.
लंड से चिकनाहट साफ करके मैंने फिर से अपना लंड चूत के अन्दर डाल दिया.

वे आंखें बंद करके सिसकारियां ले रही थीं और चूत चूदाई का मजा ले रही थी.

मैं उन्हें फिर से किस करने लगा और एक हाथ से उनके निप्पल को मसलने लगा.

मैं अब बहुत जोश में आ गया था तो बहुत ज़ोर से अपना लंड अन्दर-बाहर करने लगा.
उन्हें बहुत ज़ोर से चोदने लगा.
मुझे चाची को चोदते हुए 15 मिनट हो गए थे.

चाची Xxx चुदाई करते हुए मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं अब झड़ने वाला हूँ.
तभी चाची ने तेजी से हांफते हुए कहा- आह और ज़ोर जोर से करो … मैं झड़ने वाली हूँ!

करीब 10-15 झटकों के बाद चाची अचानक कांपने लगीं और झड़ गईं.

मैं और ज़ोर से झटके मारने लगा और 15-20 झटकों के बाद मैं भी झड़ गया … उनकी चूत में ही, क्योंकि मुझे डर नहीं था.
मैंने कंडोम पहना हुआ था.

हम दोनों पसीने-पसीने हो गए थे.
वैसे वह टाइम भी गर्मियों का ही था.

फिर मैं चाची के बगल में लेट गया.
चाची मुझे देखकर मुस्कुराने लगीं और बोलीं- कर ली तूने अपने मन की!

तो मैंने बोला- मैं तो आपको कब से चोदना चाहता था, पर कभी मौक़ा ही नहीं मिला!

कुछ पल बाद मैंने पूछा- चाची, आपको कैसा लगा?
तो उन्होंने कहा- मुझे बहुत मज़ा आया … तेरे चाचा भी बहुत अच्छे से चुदाई करते हैं, पर तेरे साथ ज़्यादा मज़ा आया!

फिर उन्होंने मुझे किस किया और बाथरूम में चली गईं.
दस मिनट बाद मेरा फिर से खड़ा हो गया तो मैंने फिर से उन्हें चोदने के लिए बोला.
वे फिर से रेडी हो गईं.

इस बार मैंने उन्हें घोड़ी बनाया और पीछे से उनकी चूत में लंड डाल दिया.
बस फिर से शुरू हो गईं चाची की सिसकारियां.

इसी तरह मैंने उन्हें 10 मिनट चोदा और उसके बाद मैंने उन्हें अपने ऊपर ले लिया – काउगर्ल के जैसे और नीचे से उनकी चूत में ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगा.
वे भी ऊपर से ताल से ताल मिला रही थीं.

इस पोजीशन में वे एक बार झड़ गईं पर मैं रुका नहीं और लगातार धक्के मारता रहा.
कुछ 5 मिनट बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए.

मैं इस बार भी अन्दर ही झड़ा क्योंकि मैंने कंडोम पहना हुआ था.

इस तरह मैंने अपनी गांव वाली चाची को चोद दिया.

उसके बाद तो मैंने कई बार अपनी इसी चाची को चोदा और मज़े किए.

दोस्तो, यह सेक्स कहानी मेरी गांव वाली चाची की मस्त चुदाई की थी.
आपको मेरी ये सेक्स कहानी कैसी लगी … प्लीज मेल करके जरूर बताएं.

वैसे ये कहानी नहीं, एक सच्ची घटना है

Share This Article

Related Posts

सगी भाभी की चूत की आग बुझाई antervasna stories

दोस्त की प्यासी बीवी को पेला antervasna stroies

चाची के बड़े आम चूसकर चुत चोदी antervasna stories

Comments

Leave a Comment