Bhabhi sex story
भाबी सेक्स कहानी में गोलगप्पे खाते हुए एक भाबी से बात हो गयी. हमने फोन नम्बर भी ले लिए. मैं उससे बात करने लगा. उन्होंने बताया कि उनके पति से उन्हें सेक्स का पूरा मजा नहीं मिलता.
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम रोहित है.
मेरी उम्र 28 साल की है. मेरा लंड सामान्य साइज़ का है … जैसा कि आमतौर पर भारतीय मर्द का होता है.
मैं मध्य प्रदेश के ग्वालियर का रहने वाला हूँ.
मैं अंतर्वासना और फ्री सेक्स कहानी पटल का एक नियमित पाठक हूँ.
मुझे भाभियां बहुत पसंद आती हैं.
कोई भी भाबी दिख जाती है, तो बस ऐसा लगता है कि उनके मम्मों को पकड़ कर पी लूँ.
प्राथमिकता भाबी की चुदाई को है, अन्यथा की स्थिति में कुंवारी लड़की या आंटी को भी चोद लेता हूँ.
भाबी सेक्स कहानी तब शुरू हुई जब एक दिन मैं ग्वालियर के मार्केट बाड़े पर जा रहा था.
वहां एक गोलगप्पे के ठेले पर खड़ा होकर मैं गोलगप्पे खाने लगा था.
मेरे साथ ही एक भाबी भी गोलगप्पे खा रही थीं.
गोलगप्पे खाते-खाते ही मेरी उनसे बात होने लगी.
उन्होंने बताया कि मैं भी ग्वालियर से हूँ … और ठाठीपुर की रहने वाली हूँ.
फिर हमने गोलगप्पे खाने के बाद साथ में चलना शुरू किया.
कुछ दूर चलने पर हमने एक-दूसरे के नंबर ले लिए.
फिर उन्होंने पूछा- आप क्या करते हो?
मैंने कहा- कुछ खास नहीं, बस छोटा-मोटा बिज़नेस करता हूँ!
उन्होंने कहा- ओके.
मैंने उनका नाम पूछा, तो उन्होंने बताया- मेरा नाम पूजा है.
फिर वे अपने घर चली गईं.
मैंने रास्ते में उन्हें कॉल किया.
वे टेम्पो (शेयर टैक्सी) से घर जा रही थीं.
मैंने उनसे पूछा कि आप किधर तक पहुंच गईं?
वे बोलीं- मैं बस घर पहुंचने वाली हूँ.
मैंने कहा- ओके भाबी, आप घर पहुंच कर मुझे कॉल करना.
उसने कहा- ठीक है, घर पहुंच कर कॉल करती हूँ.
थोड़ी देर बाद मेरे पास कॉल आया.
हम दोनों बातें करने लगे.
मैं उनके पति के बारे में पूछने लगा.
भाबी ने बताया- मेरे हस्बैंड ग्वालियर में दो महीने में आते हैं. वे ज्यादातर बाहर ही रहते हैं. उनका पुट्टी का काम है, घरों में पुट्टी पेंट आदि का ठेका लेते हैं. कोई बात है क्या?
मैंने कहा- नहीं कोई बात नहीं है … मैं तो बस ऐसे ही पूछ रहा था.
अब मेरी उनसे बातें होने लगी थीं और धीरे-धीरे ऐसे ही दस दिन तक लगातार बातें चलती रहीं.
भाबी को मुझसे बात करना अच्छा लगने लगा था तो वे काफी देर देर तक बात करती रहती थीं.
उन्होंने अपने बारे में काफी कुछ बताते हुए कहा कि मेरे दो बच्चे हैं.
एक तो अभी दो साल का भी नहीं हुआ है!
मेरे मुँह से निकल गया कि तो वह अभी भी आपका दूध पीता होगा?
वे हंस दीं और बोलीं- हां, बच्चे को मां का दूध पिलाना जरूरी होता है न. आप क्यों पूछ रहे हो?
मैंने कहा- नहीं बस ऐसे ही!
वे हंस दीं.
हम दोनों शायद एक दूसरे के मन की बात समझ गए थे कि मम्मों में दूध आता है, ऐसा सुनने में किसी भी मर्द को कैसा मस्त सा लगता है.
बात दो बच्चों को लेकर हो रही थी तो मैंने पूछा- दो हो गए … क्या अभी और भी करना है?
उन्होंने कहा- बस अब नहीं करना!
मैंने छेड़ते हुए कहा- कर लो.
वे बोलीं- अब नहीं हो पाएगा.
मैंने पूछा- क्यों नहीं हो पाएगा?
उन्होंने कहा- इसलिए नहीं हो पाएगा कि मेरे वे कर ही नहीं पाते.
मैंने कहा- ठीक है, तो मैं कर लेता हूँ!
उन्होंने हंसकर कहा- पागल हो, कैसी बातें करते हो! तुम्हारा मन करने का है क्या?
मैं चुप हो गया.
उनकी आवाज में कुछ तल्खी आ गई थी तो मुझे लगा कि वे बुरा मान गईं.
मैं उनसे सामान्य बातें करने लगा.
वे भी सहज हो गईं.
दो दिन और बात करते-करते मैं पुनः उनसे सेक्सी बातें करने लगा.
उन्होंने बताया- जब हस्बैंड आते हैं तो एक दिन में चार-पांच बार करते हैं. हालांकि ज्यादा देर तक नहीं कर पाते हैं, जल्दी ही हो जाता है उनका!
मैं बोला- फिर?
वे हंस दीं और बोलीं- किस्तों में हो जाता है!
हम दोनों हंसने लगे.
ऐसे-ऐसे एक महीना हो गया.
एक दिन मैंने कहा- हम मिल सकते हैं क्या भाबी?
भाबी ने कहा- हां ठीक है, मिल लेते हैं.
उन्होंने मुझे अगले दिन मुरार मार्केट पर बुलाया.
मैं उन्हें उधर से बाइक पर बैठाकर ले गया.
बाइक पर बैठे हुए हम दोनों ज्यादा चिपके हुए नहीं थे.
बस यूं ही बैठ कर बाइक पर घूमने का मजा लेते लेते बातें कर रहे थे.
मैंने उनका एक हाथ अपने आगे रख लिया और कहा- मुझसे सही से चिपक कर बैठो!
वे मुझसे चिपक कर बैठ गईं.
हम बातें करते हुए जा रहे थे.
मैंने पूछा- किसी होटल में चलें?
वे बोलीं- नहीं, होटल नहीं … मुझे डर लगता है.
मैंने कहा- तो कहां चलूँ?
उन्होंने कहा- आज मेरे घर पर आ जाना. मैं शाम को बुला लूँगी. मेरे घर पर कोई नहीं है. कॉलोनी में भी कोई देखता नहीं है.
कुछ देर बाद मैंने उन्हें मुरार (ग्वालियर का एक हिस्सा) ही वापस छोड़ा और घर आ गया.
शाम को आठ बजे मैं उनके घर पहुंच गया.
वे रेड कलर की साड़ी पहनी हुई थीं.
वे बहुत सेक्सी लग रही थीं.
उन्होंने मेरे लिए चाय बनाई.
चाय पीने के बाद मैंने कहा- चलो, रूम में चलते हैं!
उन्होंने कहा- रुक जाओ … खाना तो खा लो!
मैंने कहा- ठीक है, ले आओ.
उन्होंने मेरे लिए पनीर की सब्जी, छोले और चावल बनाए थे.
मैंने खाना खाया.
तब तक उनके दोनों बच्चे सो चुके थे.
खाना खाने के बाद हम रूम में गए.
अब मुझसे रहा नहीं गया.
मैंने उन्हें किस करना शुरू कर दिया.
भाबी मुझे जोर-जोर से किस कर रही थीं.
मैंने धीरे से उनके ब्लाउज़ के बटन खोल दिए और मम्मों को पीना शुरू कर दिया.
मम्मों में से दूध आ रहा था तो मैं भाबी का दूध पीने लगा.
बच्चों के हिस्से के दूध को पीने की बात कही तो भाबी बोलीं कि उनको बहुत ज्यादा दूध आता है जिससे मुझे खुद से अपने चूचों को निचोड़ कर दूध निकालना पड़ता है.
अब मैं दम से उनके मम्मों को चूस कर खाली करने लगा.
वे भी बहुत गर्म होने लगीं.
उन्होंने मेरा पैंट खोल दिया और मेरे नीचे आ गईं.
भाबी ने मेरा लंड पैंट के अन्दर से निकाला और अपने मुँह में ले लिया.
वे जोर-जोर से लौड़े को चूसने लगीं.
मैंने भी भाबी के मुँह में झटके देने शुरू कर दिए.
फिर मैंने उनकी साड़ी और पेटीकोट दोनों निकाल दीं, चड्डी भी उतार दी.
मैं भाबी की चूत देखी तो पता चला कि उन्होंने आज ही बाल साफ़ किए थे.
बिल्कुल चिकनी, गुलाबी चूत …
मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया.
वे भी बहुत गर्म हो गईं.
कुछ ज्यादा ही चुदासी हो गई थीं तो चोदने के लिए कहने लगी थीं.
मैं उनके ऊपर था, वे मेरे नीचे.
हम एक-दूसरे का चूस रहे थे.
फिर भाबी ने कहा- डाल दो.
मैंने अपना लंड भाबी की चूत में डाल दिया.
उन्हें चुदने में बहुत मज़ा आने लगा.
वे बोलीं- आज बहुत दिनों बाद लंड अन्दर लिया है.
मैंने भाबी को बहुत ज़ोर-ज़ोर से चोदा, घोड़ी बनाकर भी किया.
भाबी को बहुत मज़ा आ रहा था.
वे बोलीं- तुम बहुत अच्छे से चुदाई करते हो. मेरे हस्बैंड तो एक ही पोजीशन में करते हैं. तुमने मुझे बहुत सारे पोजीशन्स में चोदा है!
मैंने कुछ देर और चोदने के बाद कहा- अब मेरा निकलने वाला है!
उन्होंने कहा- मेरा तो कब का निकल गया है. तुम अन्दर ही छोड़ दो!
यह सुनकर मैंने सारा माल भाबी की चूत में ही छोड़ दिया.
मेरे लौड़े से गर्म-गर्म वीर्य की धार भाबी की चुत के अन्दर भर गई.
चुदाई के बाद भाबी कहने लगीं- रात में यहीं रुक जाओ!
मैंने कहा- नहीं यार, घर जाना जरूरी है. मैं ऐसे ही आता रहूँगा … तुम बस बता दिया करो!
फिर मैं घर आ गया.
भाबी ने मुझे कॉल किया- तुम घर पहुंच गए क्या?
मैंने कहा- हां, पहुंच गया.
उन्होंने कहा- मुझे बहुत अच्छा लगा तुमसे मिलकर … तुम कल भी मेरे लिए आना और पूरी रात मेरे पास रुकने के लिए आना.
मैंने ओके कह दिया.
एक बार की भरपूर चुदाई के बाद अगले दिन मैं पूरी रात रुकने के लिए भाबी के घर आ गया था.
भाबी एक झीनी सी शिफॉन की साड़ी में मुझे रिझा रही थीं.
मैंने उन्हें अपने आगोश में भर लिया और हम दोनों एक दूसरे पर लगभग टूट पड़े.
होंठों का चुंबन एक दूसरे को खाने लगा था.
मैं उनके दूध भी मसलता जा रहा था.
भाबी ने मेरे कान में सरगोशी की कि चलो बेडरूम में चलते हैं.
मैंने उन्हें अपनी गोदी में उठा लिया और कमरे में ले जाकर उन्हें खड़ी करके उनके बदन से सारे कपड़े हटा दिए.
मैं उनके रस भरे मम्मों को पकड़ कर उन्हें चूसने और मसलने लगा.
वे आह आह करती हुई मस्ती से अपने दूध चुसवा रही थीं.
अपने दोनों दूध मुझसे चुसवाती हुई वे बहुत गर्म हो चुकी थीं.
उनकी सांसें तेज़ और गर्म हो गई थीं, बदन पसीने से तर-बतर.
वे बार-बार कराह रही थीं ‘आहह … रोहित … और ज़ोर से … चूसो ना …’
मैंने उनके ब्लाउज के ऊपर से उनके दोनों दूध बारी-बारी चूसे.
बाद में ब्लाउज खोल कर यूं लटका रहने दिया और ब्रा को ऊपर उठा कर दूध बाहर निकाल लिए.
बड़े-बड़े, मुलायम, गर्म … निप्पल्स पहले से ही सख्त और खड़े हो चुके थे.
मैंने उन्हें हल्के-हल्के दांतों से काटा, जीभ से घुमाया.
हर बार वे सिहर उठतीं, कमर ऊपर को उठातीं.
फिर मैंने उनका पेट चूमते हुए नीचे की तरफ़ जाना शुरू किया.
साड़ी को कमर तक ऊपर किया, उनकी सफ़ेद पेटीकोट भी ऊपर चढ़ाई.
उनकी पैंटी पहले से ही गीली थी … बीचों बीच में बड़ा-सा गीला धब्बा साफ बता रहा था कि चुत रिस रही है.
मैंने नाक से उनकी चुत की खुशबू अपने नथुनों में भर ली.
आह … मस्त मादक वाली महक मेरे तान मन को उत्तेजित करने लगी.
मैं जीभ निकाल कर चुत के ऊपर लगे रस को चखने लगा.
मस्त नमकीन स्वाद मुझे बौरा गया था.
उन्होंने शर्माते हुए कहा- मुझे शर्म आ रही है … प्लीज ऐसे मत देखो न!
मैंने मुस्कुराकर कहा- शर्म किस बात की … अब तो सब कुछ मेरा ही हो गया है … कल भी तो तुमने मस्त मजा दिया था न!
वे इस्स करके रह गईं.
मैंने उनकी पैंटी को एक झटके में नीचे खींच दिया.
मेरे सामने भाबी की एकदम चिकनी झांट रहित गुलाबी चूत मेरे सामने थी.
उसमें पहले से ही रस टपक रहा था.
मैंने जीभ को लंबा निकाला और पहले बाहर बाहर चाटा.
वे एकदम से सिहर गईं और उन्होंने मेरे बालों को पकड़ कर मेरे सर को दबोचने का प्रयास किया.
मैं नहीं रुका … अपनी जीभ को चुत पर ऊपर से नीचे तक फेरता चला गया.
उसके बाद झपट कर चुत के दाने को अपने होंठों में दबा कर हल्के हल्के से खींच कर चूसा.
मेरे इस कदम से वे बौखला गईं और मेरे बालों को मुट्ठी से दबोच कर खींचती हुई तेज स्वर में चीख पड़ीं- आआहह … रोहित … ओहह … बहुत मज़ा आ रहा है!
मैंने उनकी बात से और ज्यादा उत्तेजित होते हुए अपनी जीभ को चुत में और अन्दर तक डाल दिया.
उनकी मुलायम चूत की फांकों से मेरी खुरदुरी जीभ टकराई तो उन फांकों ने अपने अन्दर से बहता हुआ गर्म-गर्म रस मेरी जीभ पर टपकाना शुरू कर दिया.
वह रस आता हुआ ऐसे लग रहा था मानो संतरे का रस निकालने के लिए उसे मशीन में डाल कर पेरा जाता है … और वह अपनी रसभरी फांकों से रस को स्खलित करने लगता है.
मैंने भाबी की मरमरी चुत को पूरी तरह से अपने मुँह में भर भर कर चाटा, चूसा.
फिर अपनी दो उंगलियां चुत के अन्दर डालकर फिंगर फक का मजा देते हुए भाबी की चुत को चोदने लगा.
चुत में अपनी उंगलियों को तेजी से अन्दर-बाहर करते हुए मैंने उनके जी-स्पॉट को दबा दिया.
भाबी एकदम से पागल हो गईं और कमर को ऊपर नीचे करती हुई मेरे मुँह पर अपनी चुत को रगड़ने लगीं.
वे अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा भी रही थीं.
ऐसा लग रहा था मानो भाबी मुझे अपनी चुत के रास्ते अन्दर घुसेड़ लेंगी.
कुछ मिनट बाद वे चरम पर पहुंच गईं और बेताब होकर चीख पड़ीं- आह बस … बस करो … मैं झड़ने वाली हूँ … आआह!
अगले ही पल उनका पूरा बदन कांप उठा.
चुत से गर्म रस की एक तेज़ धार मेरे मुँह में आ गई.
मैंने सब चाट लिया, आखिरी बूंद तक.
भाबी हांफ रही थीं.
वे बोलीं- अब चुदाई की बारी … मुझे तुम्हारा लंड अन्दर चाहिए … जल्दी!
मैंने जल्दी से अपनी पैंट और अंडरवियर उतारी.
मेरा छह इंच का लंड पहले से ही पूरा तना हुआ था और उसका सुपाड़ा चमक रहा था.
उन्होंने लौड़े को देखकर आंखें फैला दीं और उसे हाथ में पकड़ लिया.
‘वाह … आज तो ये और ज्यादा सख्त है … कितना गर्म!’
उन्होंने इतना कहा और घुटनों पर बैठ कर मेरे लौड़े को अपने मुँह में ले लिया.
उनका गर्म, गीला मुँह मेरे लंड पर सरक रहा था.
वे पूरी तरह से लौड़े को अन्दर तक ले रही थीं, फिर बाहर निकाल कर अपनी जीभ से सुपाड़े को चाट रही थीं.
मैं उनके बाल पकड़ कर धीरे-धीरे मुँह में धक्के देने लगा.
भाबी लंड को गले तक ले रही थीं, अपनी आंखें बंद करके मुख मैथुन का मज़ा ले रही थीं.
कुछ देर बाद मैंने उन्हें रोका- अब बस … मैं इसे तुम्हारी चूत में डालना चाहता हूँ!
उन्होंने मुस्कुरा कर बिस्तर पर चित लेट कर पैर फैला दिए.
भाबी सेक्स के लिए अश्लील भाव से अपने होंठों पर लौड़े के रस को चाटती हुई बोलीं- आ जाओ … फाड़ दो मेरी चूत को!
मैंने अपना लंड उनकी चूत के मुँह पर रखा, पहले धीरे से सुपाड़ा अन्दर किया. उनकी चुत बड़ी गर्म और बहुत टाइट थी.
मैंने एक झटके में आधा लंड अन्दर कर दिया.
वे मीठे दर्द से चीख उठीं- आहह … धीरे … ओहह … आज ये कुछ ज्यादा ही मोटा लग रहा है!
मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड अन्दर कर दिया.
अब मैं पूरी तरह उनके अन्दर था.
मैंने धक्के देना शुरू किया … पहले धीमे, फिर तेज़.
हर धक्के के साथ उनके दूध हिल रहे थे और वे मादक आवाज में कराह रही थीं- आह हां … ऐसे ही … और ज़ोर से चोदो मुझे!
मैंने उनकी टांगें अपने कंधों पर रखीं और गहरे-गहरे धक्के मारे.
कमरे में फच्च-फच्च की आवाज़ें गूँज रही थीं.
उनका रस मेरे लंड पर चिपक रहा था.
फिर मैंने उन्हें पलट दिया, जल्दी से पीछे से लंड को चुत में पेल डाला.
अब उनकी गांड मेरे पेट से टकरा रही थी.
मैंने उनके बाल पकड़े और जोर-जोर से चोदने लगा.
भाबी तकिए में मुँह दबाकर चीख रही थीं- आआहह … रोहित … मार डालो … बहुत मज़ा आ रहा है!
करीब बीस मिनट तक मैंने उन्हें हर पोजीशन में चोदा.
मिशनरी, डॉगी, काउगर्ल.
आखिर में जब मैं झड़ने वाला था, तो मैंने पूछा- अन्दर डालूँ?
वे हांफती हुई बोलीं- हां … अन्दर ही डालो … पूरा भर दो मुझे!
मैंने आखिरी ज़ोरदार धक्के मारे और गर्म-गर्म वीर्य की धार उनके अन्दर छोड़ दी.
वे भी उसी वक्त फिर से झड़ गईं.
हम दोनों एक साथ कांपते हुए झड़ने लगे.
फिर हम दोनों हांफते हुए एक-दूसरे से लिपट गए.
उनका बदन पसीने और मेरे वीर्य से गीला था.
वे मेरे सीने पर सिर रखकर बोलीं- रोहित … आज भी बहुत मज़ा आया … तुम फिर आओगे ना?
मैंने उनके होंठ चूमकर कहा- जब तक तुम चाहोगी भाबी … मैं हर रात आऊंगा!
मैंने उनसे अपना लंड पीने के लिए कहा.
पहले तो वे थकान के चलते मना कर रही थी लेकिन मेरे बहुत कहने पर आखिरकार वे लंड पीने लगीं.
लंड का रस पीते ही उन्हें मज़ा आने लगा.
वे उसे चूसती हुई बोलीं- वाह … तुम्हारा लंड बहुत अच्छा है यार … स्वाद भी कमाल का है!
केवल दो मिनट बाद ही भाबी ने दोबारा से मेरे लंड को कड़क कर दिया.
मेरा लंड फिर से उनकी मस्त जवानी को भोगने के लिए एकदम कड़क और तैयार हो गया.
मैंने फटाफट से अपना लंड सीधा उसकी चूत में ठेल दिया.
लंड पेलते ही वे बहुत जोर से चिल्ला दीं- आआहह … तुम्हारा एक बार सेक्स के बाद कुछ और मोटा हो जाता है … थोड़ा धीरे से डालो … दर्द हो रहा है!
लेकिन मैं रुका नहीं.
मैंने स्पीड और बढ़ा दी.
मैं बहुत जोर-जोर से धक्के मारने लगा.
वे लगातार चिल्ला रही थीं- आहह … ओहह … बहुत दर्द हो रहा है… लेकिन … रुकना मत!
दस मिनट बाद भाबी सेक्स के लिए पूरी तरह गर्म हो गईं और अब वे खुद चिल्लाने लगीं- आह और तेज तेज डालो … और ज़ोर से डालो … फाड़ दो मेरी चूत को!
मुझसे भी कंट्रोल नहीं हो रहा था, मैं जोर-जोर से उन्हें पेलता जा रहा था.
काफी देर तक मैंने भाबी को कई अलग अलग आसनों में चोदा.
चोदते वक्त मैं उनके दोनों दूध को अपने हाथों में दबा कर मसलता जा रहा था.
मैंने उनके मम्मों को इतनी ताकत से दबा दिया कि वे दर्द से कराहने लगीं.
लेकिन उस समय तो वासना का तूफान अपने चरम पर था तो हम दोनों मस्ती में चुदाई का सुख लेते रहे.
अब मेरा लंड माल छोड़ने को तैयार था.
मैंने पुनः पूछा- रस अन्दर ही छोड़ दूँ न?
उन्होंने हांफते हुए कहा- हां अन्दर ही भर दो!
मैंने उनकी चुत में ही पूरा माल छोड़ दिया.
मेरे लंड की गर्म-गर्म वीर्य की धार उनकी चूत के अन्दर भरती चली गई.
फिर हम दोनों थक कर सो गए.
रात के दो बजे मेरी नींद टूटी तो भाबी को नंगी देख कर मैंने उन्हें दोबारा से चोदना शुरू कर दिया.
इस बार उन्हें दर्द हो रहा था क्योंकि उनकी चूत में से लाल-लाल खू.न आ रहा था.
पहली बार लौड़े से चुद कर उनकी चूत की खाल थोड़ी फट गई थी, एक छोटी-सी खरोंच आ गई थी.
इसलिए दर्द हो रहा था.
थोड़ी देर बाद वे भी गर्म हो गईं.
हम लोग सेक्स करने लगे.
कुछ ही देर में चुत ने पानी छोड़ दिया तो चुत चिकनी हो गई और उन्हें लौड़े का पूरा मज़ा आने लगा.
आधा घंटा बाद हम दोनों फिर से निढाल होकर सो गए.
सुबह होते-होते उन्होंने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और उसका पानी फिर से मुँह में ले लिया.
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