dever bhabhi ki chudai ki kahani
देवर भाभी Xxx कहानी में एक हॉस्टल की वार्डन ने शरारती लड़कियों को अपनी कामवासना से ग्रसित चूत की चुदाई अपने देवर से करवाने की बात सुनाई.
कहानी के पिछले अंक
आजकल की जवान लड़कियां
में आपने पढ़ा कि पांच सहेलियां नर्सिंग कॉलेज में एडमिशन लेती हैं।
सीनियर लड़कियों की गैंग लीडर नीलिमा, सोनिया की रैगिंग लेती है, उसको पूरी तरह नंगी होकर जलती हुई मोमबत्ती लेकर हॉस्टल चौराहे पर रख के आने का टास्क देती है।
सोनिया मोमबत्ती लेकर चौराहे की ओर जा रही होती है, सोनिया के हिलते बूब्स एवं उस की घनी झांटों की झलक, मोमबत्ती की रोशनी में रह रह कर दिखाई दे रही थी।
अब आगे देवर भाभी Xxx कहानी:
यहां मेरे ख्याल में एक बात आई जिस का मैं यहां उल्लेख करना चाहूंगी।
मेरे विचार में जो लड़कियां या औरतें चुदाई और नए लंड की अत्यधिक शौकीन होती हैं, वे अक्सर अपनी चूतों को इसलिए चिकनी करके रखती हैं क्योंकि पता नहीं कब नया लंड मिल जाए?
वे यह चाहती हैं कि उनको चोदने वाले हर नए मर्द की तबियत उन की चिकनी चूत देखकर चाटने, चूसने को मचल जाये।
लंड भी ऐसी चिकनी चूत में सट्ट से घुस के, खुद भी खुश होता है और औरत को भी खुश करता है।
इसके उलट जिन लड़कियों को नया लंड लेने का अवसर नहीं मिलता या जो लड़कियां इतनी कामुक नहीं होती कि हमेशा नए लंड की तलाश में रहती हों, वे अक्सर अपनी चूत पर उगे झांटों के जंगल की तरफ से लापरवाह रहती हैं।
जहां तक शादीशुदा औरतों की बात है, उनमें अधिकांश ऐसी होती हैं जिनमें शादी के कुछ साल बाद पति के लिए चूत चिकनी करने का उत्साह बचा नहीं रहता।
वे कभी करती भी हैं तो बेमन से पति के बहुत दबाव डालने पर!
अधिकांश वही औरतें अपनी चूत चिकनी रखती हैं जिनके अपने पति के अलावा किसी अन्य मर्द से शारीरिक संबंध होते हैं या जिन को नए-नए लंड से चुदने के अवसर मिलते रहते हैं।
स्पष्ट था कि सोनिया उन लड़कियों में थी जिस को अभी चुदाई का शौक नहीं लगा था इसीलिए उसने कभी अपनी इन घनी हो चुकी झांटों को साफ करने की जरूरत भी नहीं समझी थी।
वह धीमे-धीमे चलते हुए चौराहे पर पहुंची।
उसने सड़क के बीचों बीच मोमबत्ती को टिकाया और पलट के दौड़ लगाने वाली ही थी कि पूरा हॉस्टल परिसर लाइट से जगमगा उठा, वह अवाक रह गई।
उसने देखा कि चारों तरफ से सलमा, रोज़ी, हरप्रीत, नादिरा साथ में कुछ अन्य दुस्साहसी लड़कियां एकदम नग्न अवस्था में उसकी ओर बढ़ रही थीं।
सोनिया हाथों में मुंह छुपा कर जमीन पर घुटनों के बल बैठ गई पर किसी भी स्थिति में उस के सिर से पैर तक, नंगे जवान बदन को छुपाना संभव नहीं था।
इतने में किसी ने म्यूजिक लगा दिया और ‘धूम मचा ले धूम…’ की आवाज आने लगी।
अब सोनिया से भी रुका नहीं गया, उसने भी इस बदले हुए परिवेश का मजा लेने की मन में ठान ली और अपनी लज्जा का आवरण उतार फेंका।
वह कुछ तय कर के उठी और बिना अपनी नग्न देह तथा घनी झाँटों की परवाह किए, धूम मचा ले…गीत पर बिंदास थिरकने लगी।
सारी लड़कियां भी मस्ती में आकर चूतड़ों और बूब्स को हिला हिला कर अपनी कामुकता का प्रदर्शन कर रही थीं।
जो लड़कियां वहां नहीं पहुंचीं, वे भी दूर से ऐसे कामोत्तेजक दृश्य को देख कर अपनी अपनी चूतों को सहलाने लगी थीं।
सबकी स्थिति ऐसी थी कि यदि ऐसे में भूला भटका कोई लड़का वहां पहुंच जाए तो शायद सब उस पर टूट पड़ें और उसके लंड को निचोड़ के रख दें।
उसके बाद कुछ लड़कियों ने आपस में स्तन से स्तन और चूत से चूत मिला कर कपल डांस शुरू किया।
जिनकी झांटे थीं उनको देख कर ऐसा लग रहा था कि कहीं झांटों की रगड़ से आग न सुलग जाए.
तो कुछ लड़कियां ऐसी भी थीं, जिन की चूतें एकदम चिकनी थीं।
इनमें सलमा और नादिरा प्रमुख थीं।
वहीं कुछ लड़कियां अपनी चूत को दूसरी लड़की के चूतड़ों से सटा कर, उसके पीछे से उसके स्तनों को सहलाने और दबाने लगीं।
एक के बाद एक गाने बदलते रहे और लड़कियां उन पर ठुमक ठुमक के इन नग्न नृत्यों का आनन्द लेती रहीं।
जब मस्ती अपने चरम पर थी और ‘पिया तू अब तो आ जा’ वाले गाने पर सभी लड़कियां चुदाई की भाव भंगिमा वाली, अश्लील हरकतें करती हुई डांस कर रही थीं.
तभी वहां हॉस्टल वार्डन फातिमा की सीटी की आवाज़ सुनाई दी।
सभी लड़कियां अपने अपने कमरों की ओर दौड़ गईं।
उफनती जवानी की मालकिन फातिमा अभी कुल 38 वर्ष की थी, उसका रंग गेहुंआ 5′ 2″ की लंबाई, 38 – 34 – 40 वाला कामुक बदन, उसकी जवानी उसके कपड़ों में नहीं समा रही थी।
ससुराल के करीब करीब सारे मर्दों के लंड ले ले कर ही उसका बदन गदराया था।
उसने सीनियर लड़कियों को तो वहां से जाने दिया और जूनियर लड़कियों के कमरों की तरफ बढ़ी।
वह यह सोचकर जा रही थी कि पहले भी खीरा और बैंगन वाले मामले को उसने ज्यादा तूल नहीं दिया था पर आज इन नई लड़कियों को सबक सिखाना ही पड़ेगा।
पहले कमरे की पांच लड़कियों को डांट पिलाकर, वह जैसे ही दूर कमरे में आई, नादिरा ने कुछ अलग ही प्लान कर रखा था.
उसने आवाज लगा के लड़कियों को दरवाज़ा बंद करके सक्रिय हो जाने को कहा।
सारी सहेलियां बिजली की तेजी से नादिरा के निर्देशों का पालन करने लगीं।
सोनिया, रोज़ी ने फातिमा के दोनों हाथ पकड़े और सलमा ने फातिमा के मुंह पर कपड़ा बांध दिया और बोली- पहली बार मेस में तुम्हारी दादागिरी झेल ली। यदि आज तुम को सबक नहीं सिखाया तो तुम रोज गांड में उंगली करने चली आओगी।
नादिरा ने फातिमा से कहा- हम लोगों को ज्यादा परेशान किया तो तुम्हारा ये डंडा तुम्हारे ही भोसड़े में डाल दूंगी, आया समझ में!
फातिमा ने अपनी गर्दन दाएं बाएं हिलाई जिससे उसके मुंह का कपड़ा थोड़ा खिसक गया वह बोली- नादिरा मेरी बच्ची, मेरी बात तो सुन!
नादिरा बोली- अब आई हो न लाइन पर, बताओ क्या बात है?
फातिमा बोली- अरे दस नई लड़कियों में मैं समझ गई थी कि तुम पांचों काम ऊर्जा से भरी हुई हो. इसलिए मैं तो आज खुद तुम सब को डांटने नहीं बल्कि तुम लोगों से दोस्ती करने के इरादे से आई थी। पास वाले कमरे की पांचों लड़कियों को तो मैं चमका के आई हूं।
नादिरा ने आश्चर्य से पूछा- हम से दोस्ती? क्यों? इरादा क्या है तुम्हारा??
फातिमा आंख मार के बोली- अब मेरे बदन में भी वासना की आग भरी हुई है। मेरा भी वही इरादा है, जो तुम सब का है, मुझे अपने से अलग मत समझो।
नादिरा ने इशारा किया, सोनिया और रोज़ी ने फातिमा के हाथ छोड़ दिए।
नादिरा ने फातिमा से कहा- मुझे लगता है तुमको हमारे ग्रुप में शामिल करना ही पड़ेगा।
फातिमा ने कहा- अभी मुझे जाना होगा क्योंकि प्रिंसिपल साहब विजिट पर आने वाले हैं लेकिन मैं जल्दी ही तुम सब को अपनी कहानी जरूर सुनाऊंगी, जिससे हमारी दोस्ती मजबूत हो सके।
यह कह के फातिमा जल्दी से चली गई।
करीब पौन घंटे बाद वह वापस लौटी।
रात के साढ़े ग्यारह बज चुके थे।
उसके आते ही पांचो लड़कियां फिर उसके आसपास इकट्ठा होकर बैठ गईं।
नादिरा ने कहा- हां तो चलो शुरू करो तुम्हारी काम-कथा!
फातिमा बोली- मैं तुम सबसे दोस्ती करके यह कहना चाहती हूं कि मैं हॉस्टल की वार्डन हूं तो क्या हुआ, मेरी भी तो हसरतें हैं, मुझे भी तो चरमसुख की जरूरत पड़ती है। तुमने शायद गौर नहीं किया, मैंने तो मेस में भी यह हिंट दिया था कि मैं भी एक जवान औरत हूं और तुम्हारी ही तरह मेरा भी वासना से भरा शरीर है। मेरी जवानी और मेरी कामुकता दोनों मेरे काबू में नहीं है। मैं भी तुम सब की तरह जिंदगी के मजे लेना चाहती हूं।
सोनिया ने पूछा- क्यों मजे देने के लिए, तुम्हारा शौहर नहीं है क्या?
फातिमा बोली- अरे है तो सही … पर साला ढीला लंड है, रोज मुझे सुलगा के छोड़ देता है।
अब सलमा बोली- यदि ऐसा है तो फिर तुमने किसी और मर्द से चुदवा के कभी अपनी प्यास बुझाने की कोशिश नहीं की क्या?
फातिमा बोली- की न यार … और चुदवाया भी! तुझे तो पता ही होगा कि अपने परिवारों में मर्द लोग किस तरह चूत के पीछे पागल रहते हैं। अरे दूसरों की क्या बात करूं मुझे तो मेरे सगे बेटे तक ने नहीं छोड़ा।
पांचों लड़कियां फातिमा के इस राज को जानकर हैरान थी.
वे अब फातिमा की पूरी कहानी सुनना चाह रही थीं।
फातिमा कह रही थी- अब मेरी गर्म चूत को नए-नए लौड़ों के स्वाद की तलब लगी रहती है। इसके लिए मैंने सोचा कि हॉस्टल में मेरे जैसी चार-पांच लड़कियां चुन लेती हूं जो वासना की आग में जल रही हों और पढ़ाई के साथ साथ जिंदगी का भरपूर आनन्द लेना चाहती हों। मैं उनको सहयोग करूंगी तो ज्यादा चर्चा भी नहीं होगी और मुझे भी उनके जवान बॉयफ्रेंडों के लौड़ों से खेलने का मौका मिल जाया करेगा।
नादिरा ने फिर कहा- बहुत हो गई भूमिका, अब पहले तुम अपनी बात ज़रा खुल कर बताओ, जिससे तुम्हारी बात समझ में भी आए और हम लोग अपने अपने शरीर में होने वाली सनसनी का मजा भी ले सकें।
सब लड़कियां नंगी ही फातिमा के चारों ओर घेरा बनाकर बैठ गईं।
नादिरा ने फिर कहा- बोलो तुम क्या बोल रही थीं?
फातिमा ने कहा- तो सुनो मेरी मजेदार कहानी! यार, मेरी शादी को 19 साल हो चुके हैं. सुहागरात की रात जब मेरा शौहर मेरी चूत में अपना लंड घुसेड़ भी नहीं पाया और चूत के बाहर ही ढेर हो गया तो तुम सब समझ सकती हो कि उसे रात मैं कितना तड़पी होऊंगी? मुझे कितना बुरा लगा होगा??
सबने सहमति में सिर हिलाया.
फिर फातिमा ने बात आगे बढ़ाई और कहा- मैंने फिर भी अपने मन को समझाया कि पहली पहली बार में शायद हो सकता है कि असलम अपने उफान पर नियंत्रण नहीं रख पाया लेकिन मेरा यह अनुमान भी गलत निकला। मेरा शौहर साला चुदाई के मामले में एकदम फिसड्डी और शीघ्रपतन का मरीज़ निकला।
जब भी वह मेरी चुदाई करता है तो मुझे कभी चरम सुख नहीं दे पाता और जल्दी ही मेरी चूत की आग भड़का के उतर जाता है।
पिछले 19 वर्षों में मैं असलम के लंड से मुश्किल से 15-16 बार झड़ी होऊंगी. यानी साल में एक बार से भी कम, वह भी जबरदस्ती उसका लंड पकड़ के अपनी चूत पर रगड़ने से।
अक्सर तो उसका लंड इतनी जल्दी सिकुड़ जाता है कि मैं उस को पकड़ के अपनी चूत पर रगड़ भी नहीं पाती हूं।
ऐसे में मुझे कई बार अपनी बेचैनी खत्म करने के लिए गुसलखाने में जा के हस्तमैथुन करना पड़ता था।
हमारे गुसलखाने में दरवाजा भी नहीं है, बस एक टाट का पर्दा टंगा रहता है।
एक बार मेरे एक हमउम्र देवर ने, मुझे अपनी चूत में उंगली कर के हस्तमैथुन करते देख लिया।
वह हरामी समझ गया कि मैं उसके भाई की चुदाई से असंतुष्ट, अतृप्त हूं।
वह गुसलखाने में घुस आया और उस ने मुझे पीछे से पकड़ लिया।
उस का एक हाथ मेरे मुंह पर था जिससे मैं चिल्ला ना सकूं, दूसरे हाथ से उसने मेरा बाजु पकड़ के मुझे खड़ा कर दिया।
मेरी सलवार तो खुली हुई थी ही, उस ने वहीं खड़े खड़े मेरी चूत में उंगली करनी शुरू कर दी।
मैं कसमसाती रही लेकिन वासना उसके दिमाग में चढ़ चुकी थी, वह नहीं माना।
उसके बाद उसने मुझे पलटाया और अपने 5.5 इंच लंबे कड़क लंड पर थूक लगाकर, मेरी चूत में घुसेड़ दिया और जबरन मुझे चोदना शुरू कर दिया।
चूंकि मैं तो खुद उस समय बुरी तरह से वासना की आग में जल रही थी, मैं तो खुद यह चाहती थी कि कहीं से भी आकर कोई भी मर्द अपना कड़क लंड मेरी चूत में घुसेड़ के मुझे कसके रगड़ दे।
इसलिए जैसे ही देवर ने मुझे दीवार के सहारे खड़ा करके अपना लंड मेरी चूत में घुसेड़ा, मुझे तो एक अत्यंत आनन्ददायक अनुभूति हुई।
जब उसने देखा कि मैं विरोध नहीं कर रही हूं तो उसने मेरे मुंह पर से अपना हाथ हटा लिया।
उसके बाद उसने मेरी कुर्ती को ऊपर किया और मेरे दोनों मम्मे मसलना, चूसना शुरू कर दिया।
मैंने भी फिर देवर का पूरा साथ दिया और उसके चूतड़ पकड़ पकड़ के अपनी चूत में धक्के लगवाए।
हमारी देवर भाभी Xxx चुदाई भले ही अधिक देर तक नहीं चली लेकिन मेरी धधकी हुई चूत को मिले नए लंड के कारण देवर ने उस रात मुझे वो चरम सुख दिया कि मैं तो उसके लंड की दीवानी हो गई।
फातिमा की बातों से सभी लड़कियों की कामवासना सुलगने लगी थी और उसकी आंच उनके शरीर को तपा रही थी।
सबके लिए आश्चर्य की बात यह थी कि उनके बीच छुईमुई सी रहने वाली सोनिया ने सबसे पहले अपनी चूत को सहलाना शुरू किया।
सब एक दूसरी को देखकर मुस्कुरा रही थीं कि अब सोनिया भी उनके रंग में रंगने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से बिल्कुल तैयार है।
वह अपनी शरीफ बने रहने और उससे भी अधिक शरीफ दिखने की ग्रंथियों से वह बाहर निकल चुकी है।
सब ने अपने अपने नंगे बदन पर हाथ फेरते हुए फातिमा की कामुक गाथा की तरफ फिर से ध्यान लगाया।
फातिमा ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा- उसके बाद मुझे जब भी मौका मिलता मैं उस देवर को पकड़ के उसका लंड चूस चूस के खड़ा करती और उस पर सवार हो के अपनी चुदास को शांत करती।
एक बार की बात है, सर्द चांदनी रात थी, मुझे चुदने की जबरदस्त तलब लगी।
घर में सब थे तो मैं उस देवर को पकड़ कर छत पर ले गई।
वहां छत पर जब वह देवर, दीवानों की तरह मेरी चुदाई कर रहा था तो मेरे दूसरे दो 18 वर्षीय जुड़वां देवरों ने देख लिया जो वहां सिगरेट पीने के लिए आए थे।
नौजवान लौंडे तो हमेशा इसी चक्कर में रहते हैं कि कहीं से भी, किसी भी तरह, चूत का जुगाड़ हो जाए.
फिर क्या होना था … उन्होंने भी उस मौके का फायदा उठाया और कहा- हम दोनों भी भाभी को चोदेंगे।
ऐसी स्थिति में हम दोनों ही क्या कर सकते थे?
न मैंने मना किया, न मेरे ऊपर चढ़े देवर ने।
मैंने कहा- तुम दोनों भी आ जाओ.
फिर दोनों देवर आगे बढ़े।
दोनों नीचे से नंगे हुए और मेरे दोनों स्तनों पर पिल पड़े.
यह मेरी जिंदगी का पहला फोरसम था।
पहले देवर जो कि उन दोनों के आने से रुक गया था फिर शुरू हो गया और रगड़े लगाने लगा, बाकी दोनों देवर दोनों स्तनों को मसलते हुए निप्पलों को चूसने लगे।
मेरी उत्तेजना चरम पर थी।
मैंने अपने ऊपर चढ़े हुए देवर से कहा- अब जोर से और तेजी से रगड़ो!
उसने घर्षण और गति बढ़ा दी।
मेरा शरीर मस्ती में कांप रहा था, मेरी कमर स्वतः ही उछलने लगी।
देवर के लंड ने भी वीर्य की पिचकारी छोड़ दी।
मैं तीनों देवरों को निहार रही थी, मेरी आंखों में तृप्ति की चमक थी।
उसके बाद जब दूसरे देवर ने अपने लंड पर थूक लगाना शुरू किया तो मैंने उसको रोका और कहा- अरे यार, मेरे को थोड़ी सांस तो लेने दे। अभी तो तुम तीनों ने मिलकर मेरे जिस्म की आग बुझाई है। मुझे भी यह पता है तुम दोनों आज बिना चोदे मुझे छोड़ने वाले नहीं हो.
देवर ने कहा- मेरा लंड तो अकड़ रहा है, मुझ से इंतज़ार नहीं होगा।
फातिमा की कहानी अभी अधूरी है.
एक देवर से चुदने के बाद, उसके और तीनों देवरों के बीच जिस्मानी ताल्लुकातों के अलावा भी उस के जीवन में बहुत कुछ घटित होता है.
इस रोचक घटनाक्रम का मजा लेते रहिए और पढ़ते रहिए।
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